जब दिल नहीं कोई आत्मा दुखाने लगे
जब दिल नहीं कोई आत्मा दुखाने लगे,
आँखों में ठहरा वो पानी छलकाने लगे,
स्वप्नो की बनाई दुनियाँ को भुलाने लगे,
अपने ही रिश्ते का दीपक बुझाने लगे,
चेहरे से झलकते भावों से नज़र चुराने लगे,
कोई कहे कुछ ऐसा के अब सकूँ आने लगे।।
राही (अंजाना)
Very good
आभार