4 Comments

  1. तेरे रूप अनेक है बाबा, तेरे रूप अनेक
    प्यास नही मिटी देखन की, पल पल तुमको देख
    हाड़ मांस के पुतले है हम, बाबा तुम अविनाशी
    शरण मे ले लो शरणागत हम, हे देवो के देव

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