निर्भय आगे बढ़ता चल,
कोई रोके कोई टोके,
किसी की बात से ना जल।
किसी को देख कर बढ़ते,
अक्सर लोग करते छल।
कंटक बिछाने राहों में,
कुछ हाथ आएंगे
तो कंटक हटाने राहों से,
कुछ साथ आएंगे
उन्हें साथ लेकर चल,
ना रुक राही राहों में कभी,
ना कर परवाह अरि की पथिक,
मिलेगी मंजिल मुकद्दर साथ देगा,
जला मशाल चलता चल।।
_____✍️गीता