6 Comments

  1. ” कंटक बिछाने राहों में,
    कुछ हाथ आएंगे
    तो कंटक हटाने राहों से,
    कुछ साथ आएंगे
    उन्हें साथ लेकर चल,”
    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति सामाजिक चेतना जागृत करने में कारगर साबित होती हुई आपकी कविता अत्यन्त सुंदर है।

    1. इतनी सुन्दर और प्रोत्साहन देती हुई समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏 बहुत-बहुत आभार। आपका आशीष बना रहे

  2. निर्भय आगे बढ़ता चल,
    कोई रोके कोई टोके,
    किसी की बात से ना जल।
    ——कवि गीता जी की सुन्दर कविता, बेहतरीन अभिव्यक्ति

Leave a Reply