जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में
मगर मुस्कुराये वो एक भी दफ़ा नहीं, मेरी मुस्कुराहट पे|
जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में
Comments
5 responses to “जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में”
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Kya baat
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thank u
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वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां
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