प्यार पनपता है….
इक नन्हे पौधे की तरह
खोलकर महीन मिट्टी की परतों को
पाकर चंद बूंदे पानी की
खोलकर अपनी हरी बाहें
समा लेना चाहता है दुनिया को इनमें
मगर कभी कभी रूंध जाता है
दुनिया की आपाधापी में
किसी के पैरों तले|
Author: Nitika
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प्यार पनपता है
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मेरे अहसास लफ़्जों को तरस गये
मेरे अहसास लफ़्जों को तरस गये
वो क्या गये, हमे खुद के लिये तरस गयेMere Ahasaasa Lafzo Ko Taras Gaye
Vo Kya Gaye Hum Khud Ke Liye Taras Gaye
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उनके मुस्कुराने से आ गयी मुस्कान
उनके मुस्कुराने से आ गयी मुस्कान हमारे चेहरे पर
वरना किसी गम में डूबी जा रही थी जिंदगी मेरी -
जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में
जिक्र तो बहुत दफ़ा हुआ मिरा उनकी महफ़िल में
मगर मुस्कुराये वो एक भी दफ़ा नहीं, मेरी मुस्कुराहट पे| -
कुछ यादें
न जाने क्यों कुछ यादें अटक सी जाती है दिल में
बार बार दोहराती रहती है खुद को अधूरे लफ्जों में|