ज्ञान दीप प्रज्ज्वलित करके

***†**†*ज्ञान दीप प्रज्ज्वलित करके
उजियारा कर दें हर और
रोशन हो जाएं सब राहें
ऐसा फैला दें आलोक।
आतंकवाद बढ़ गया धरा पर ।
आतंकित है हर प्राणी
धरती से अम्बर तक अब तो
आतंकवाद का फैला शोर
ज्ञानदीप प्रज्ज्वलित करके
उजियारा कर दें हर और
रोशन हो जाएं***
ऋषियों की है वसुंधरा यह
भूल गया क्यों मानव आज
अस्थि देकर दान यहीं पर
लिखा दधीचि ने इतिहास

घूम घूम घर घर गौतम ने
दिया जगत को ज्ञान प्रकाश ।
प्राण जाएं पर वचन ना
जाईं ।
यही हमारा नारा था
सत्य अहिंसा न्याय नीति
का मेरा देश पुजारी था
भूल गया क्यों राह सत्य की
फ़ैल गई हिंसा हर और
ज्ञानदीप प्रज्ज्वलित करके
उजियारा करदें***

भीम और अर्जुन से योद्धा
इसी धरा पर जन्मे थे ।
श्री कृष्ण ने अर्जुन को यहाँ
ज्ञान दिया था गीता का
याद करो उस भीष्म को
तुम क्यों भूल हो उनका
त्याग
पिता की खुशियों की। खातिर खुद की खुशियाँ
कर दी कुर्बान
इन सब की तू याद दिलाकर
प्यार बाँट जग में हर और
ज्ञान दीप प्रज्ज्वलित करके
उजियारा कर दें हर ओर
रोशन हो जाएं सब राहें
ऐसा फैला दें आलोक

– कमलेश कौशिक

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