डर

डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता,
क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है।
डर तो रौशनी की किरणों से लगता है,
क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है।

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