तू उड़ता रह आसमाँ में कहीं,
मैं ज़मीं का हूँ तो रहूंगा यहीं,
मैं अब तुझे दिखाई भी नही देता,
तू मेरा इम्तेहान क्या लेगा?
सर को गोद में रखे मैं सज़दे में रहा,
मैं अलग हुआ मेरे जिस्म से एक अरसा हुआ,
गुमनाम दफन कर के तू मुझे ये तो बता,
तू किसलिए मेरा बयाँ लेगा?
किसी कोने में तेरे तकिये पे,
वो एक पल मेरा साँस लेता है,
तू मुझे वापिस कर मेरा लम्हा,
तू इससे ज्यादा मुझे क्या देगा?
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