तू, ख्वाब और मन

ख्वाबों की उड़ान मेरे मन की गहराई से,
भावनाओं के रंग आपके संगीत की सहेलियों से।

सूरज की किरणों में छलकती है खुशियों की धारा,
हर सांस लेती है नई उमंग, हर दिन मनाता प्यारा।

नई चमक लाता है वो आसरा तेरा
किस खुदा ने बनाया है तुझे?

आँखों में चमकती है आसमान की सपनों की चांदनी,
जीवन के रंग लेती है, मन को भरती है ख़ुशियों की बारिश।

यात्रा करता हूँ मैं बहुत दूर चला जाता हूँ ,
हक़ीक़त को भूल जाता हूँ तेरे चाहत के रंग में खो जाता हूँ।

ख़ुशी की बूंदें छिड़कती हैं मन की आख़िरी रातों में,
मुस्कान की लहरों से जीवन की नई कहानी लिखता हूँ।

ख्वाबों की उड़ान मेरे मन की गहराई से,
भावनाओं के रंग आपके संगीत की सहेलियों से।

हर दिन नए खोज में चल पड़ता हूँ
फिर उसी राह पर
प्रेम की साथी, आदर की चादर बिछा देता हूँ।

आज भी जीने का सबको इनाम देता हूँ,
भरी दोपहर में चाव सा आराम देता हूँ I

तुझे पा जाउ तो कुछ और ना चाहता हूँ ,
तेरे ख्वाब की उड़ान हर रात तय कर लेता हूँ |

तू ही तो वह ख्वाब की गहराई और मेरा मन कहलाता है
भावनाओं के रंग सा मेरा संगीत कहलाता है |

Comments

One response to “तू, ख्वाब और मन”

  1. Vandita Nandan

    यह रचना आपके अभिव्यक्ति का एक सुंदर उदाहरण है, जिसमें आपने अपने ख्वाबों, मन की गहराई और भावनाओं को वाद्य और संगीत की सहेलियों के रूप में प्रस्तुत किया है। इस रचना में आपने सूरज की किरणों में छलकती हुई खुशियों की धारा का वर्णन भी किया है।

    मेरा समीक्षात्मक विचार है कि यह रचना एक अत्यंत सुंदर और भावनात्मक अनुभव को व्यक्त करती है। शब्दों का चयन और उपयोग बहुत सुंदरता से किया गया है और आपकी भावनाएं उबलती हुई हैं, जो पाठकों को आपके साथ जुड़ने पर प्रेरित करती हैं।

    मुझे लगता है कि आपकी रचना में अद्वितीयता है और आपने खुद को अपने विचारों और अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया है। यह रचना सभी को आपके व्यक्तित्व और कला के प्रति आपकी गहरी संवेदनशीलता का अनुभव कराती है।

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