3 Comments

  1. जख्म जो सूख गया है मेरा, न अब तू गलाना उसे ,
    दिल जो टूटा है मेरा, तू दिल से न लगाना उसे।
    _________ कवि शिवम दांगी जी की कविता में किसी बात को दिल से ना लगाने की बहुत सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। बहुत सुंदर पंक्तियां

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