तू ले चल वहां
जहां सितारों की चादर पर
बादलों का पहरा ना हो ।
मुसाफिर-ए-दिल
इस इश्क के सफर में हार कर ठहरा ना हो ||
जहां कई वादियां
लाजवाब बेमिसाल हो ।
सुकून बहता रहे इन नसों में
ना मन में कोई मलाल हो ।।
जहां बहती हवाओं में
तेरी जुल्फें लहराती रहे।
कितना प्यार है तुझे मुझसे
बस तेरी नजरें बतलाती रहे ।।
जहां दिन ढलने पर भी
तुझ पर मेरा दिल ढले नहीं ।
तू गलत भी कह दे
तो में मान लूं बस यही सही ।
तू ले चल वहां,
थाम पकड़ के हाथ तेरा
जहां में चल दू रास्ते बेखौफ सभी
बस एक बार उलझा लो अपनी उंगलियां मेरी उंगलियों से कयामत तक ना छूटे फिर ये साथ कभी ।।
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