दर्द चोट आसूँ जख़्म अब मरहम चाहिए।

दर्द चोट आसूँ जख़्म अब मरहम चाहिए।
सफ़र में क्या कहें हमको हमदम चाहिए।।

मेरी मुस्कुराहट पर हैरत क्यूँ करते हो तुम।
बोल दो आँखों का मंजर नम नम चाहिए।।
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अब तक जिन्दा हूँ सुनो मौत भी फरेबी है।
जिंदगी नादान को आवाज़ छमछम चाहिए।।
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वफ़ा करो मगर वफ़ा की उम्मीद न रखना।
रखो अग़र ख़ुशी की जगह ग़म ग़म चाहिए।।
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जब दिल में दर्द हो बातों से फिरआँसू आएं।
सच में कहूँ तो ऐसा मौसम कम कम चाहिए।।
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कही रात है ख़ामोशी है तन्हाई है अँधेरा है।
कही मेहफिल सजी है रौशनी चमचम चाहिए।।
@@@@RK@@@@

Comments

8 responses to “दर्द चोट आसूँ जख़्म अब मरहम चाहिए।”

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    NICE

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

  2. सीमा राठी Avatar

    अच्छा प्रयास

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      धन्यवाद

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

  3. Abhishek kumar

    Nice one

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