गलतफ़हमीं में जी रहे हो ‘हुज़ूर’ दर्द क्या होता हैं तुम्हें क्या मालूम,
ज़रा पूछो उनसे जिनके अश्कों को पलकों का सहारा नहीं मिलता,
” दर्द “
Comments
5 responses to “” दर्द “”
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Kya khoob likha he
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thank uu
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umda!
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Thanks a lot
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वाह बहुत सुंदर रचना ढेरों बधाइयां
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