इस दीपक में एक कमी है,,,,
हर सैनिक की याद जली है ।।।।।।।
जिसने दी आज़ादी हमको,,,,,,,,,
उनकी बेहद कमी खली है ।।।।।
दुश्मन को मारा सरहद पे,,,,,,,,,,
तो दीवाली आज मनी है ।।।।।।।
देखो इनको भूल न जाना,,,,,,,,,,,
जो अब तेरे बीच नही है ।।।।।।।
जिसने खोया अपना बेटा,,,,,,,,,,
उन माँओं की आह सुनी है ।।।।।
देके खुशियाँ हम लोगो को,,,,,,,
गोली खुद के लिये चुनी है ।।।।।
अपने भाई के आने की,,,,,,,,
बहना को इक आस लगी है ।।।।
तुम बिन सूने सारे दीपक,,,,,,,,,
बेवा सी दीवार खडी है ।।।।।।।
कैसे भूले बाते उसकी,,,,,,,,,,
हर कोने में याद बसी है ।।।।।
रौशन है घर सारा मेरा ,,,,,,,,,,,
उनके घर में रात जमी है ।।।।।।
दीवाली की पूजा है पर,,,,,,,
उसके पापा और कहीं है ।।।।।।।।
सूनी दरवाजे की झालर,,,,,,,
रंगोली बेकार सजी है ।।।।।।।
दीवाली पे रोके कैसे,,,,,,,
माँ की आँखे नीर भरी है ।।।।।।।
मज़बूरी त्यौहार मनाना,,,,,,,,
आई ये दुश्वार घड़ी है ।।।।।।
मरके खुशियाँ देने वाले,,,,,,,
तेरी ये सौगात बडी है ।।।।।।
ना लिख पाऊ दिल की हालत,,,,,
होता अब खामोश ‘लकी’ है ।।।।।।
दीवाली
Comments
5 responses to “दीवाली”
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nice one Nimesh ji
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Thanks Mam
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osm
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वाह जी वाह
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Jai ho
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