दुनिया पर गौर

जब दुनिया पर गौर करो
तो अपना अस्तित्व नजर आता है
भूल हो जाए तो हर शख्स रूठ जाता है
अच्छाई कहाँ याद रहती है किसी को
एक गलती से रिश्ता भी टूट जाता है
ओ मेरे व्यक्तित्व पर सवाल उठाने वालों !
प्रज्ञा’ का तो चाहने वाला भी अनमोल हो जाता है
जो मेरी गली आता है !!!!!
वो फिर सब कुछ भूल जाता है !!!!!!

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