देख पथिक

देख पथिक जिसके
विषाद से
मन गीला हो जाता हो
जिस पर माया ममता हो
जो अपनों जैसा
लगता हो,
उसे कभी भी दुख न मिले
बस उन्नति ही करता जाये
बस वह खिलता ही जाये।

Comments

One response to “देख पथिक”

  1. अति उत्तम भाव और सुन्दर प्रस्तुति

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