दोस्त

तेरे होने ना होने के बीच

मेरी आँखें पिस रही है़ं॥

रह रह के रिस रही हैं

दिन रात घिस रही हैं॥

Comments

3 responses to “दोस्त”

  1. Kavi Manohar Avatar

    इक तू है जो दिखता है इन आंखों को
    बाकी सब तो दिखना कब का बंद हो गया है|

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