धन उतना हो पास में
जितने से हो शांति,
उस धन से क्या फायदा
मन में रहे अशांति।
शांति नहीं गर जिगर में
खो जाती है कांति
उल्टा-सीधा धन कमा
आ जाती है क्लान्ति।
जीवन भर संचित करे
खाऊंगा कल सोच,
खाते समय उदर नली
ले लेती है लोच।
धन ही जीवन लक्ष्य है,
इतना भी मत सोच,
कमा स्वयं की पूर्ति को
और शांत रख चोंच।
धन उतना हो पास में
Comments
3 responses to “धन उतना हो पास में”
-
धन ही जीवन लक्ष्य है,
इतना भी मत सोच,
कमा स्वयं की पूर्ति को
और शांत रख चोंच।
*****कवि सतीश जी का धन और जीवन में सामंजस्य बिठाती बहुत ही उम्दा प्रस्तुति और अति उत्तम अभिव्यक्ति। -

बहुत खूब
-
अतिसुंदर भाव
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.