नदी को अकेले चलने का गम सताता है
नदी को भी अकेले चलने का गम सताता है….
Comments
7 responses to “नदी को अकेले चलने का गम सताता है”
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nice lines sheetal
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wah kya baat he!!!!
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bht khoob !!
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अनुपम
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वाह बहुत सुंदर रचना
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Good
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इसलिए सागर से मिलकर वह खुशी में बदल जाता है ….
Nice lines
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