नदी को अकेले चलने का गम सताता है By Sheetal Yadav Posted on December 2, 2015November 26, 2018 Category : शेर-ओ-शायरी नदी को भी अकेले चलने का गम सताता है…. इसलिए सागर से मिलकर वह खुशी में बदल जाता है ….
nice lines sheetal
wah kya baat he!!!!
bht khoob !!
अनुपम
वाह बहुत सुंदर रचना
Good
इसलिए सागर से मिलकर वह खुशी में बदल जाता है ….
Nice lines