नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है

नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है
है देवी पर क्यों अपवित्र सी है ?
है हर जीवन का स्रोत… पर
जीते जी स्वयं मृत सी है

Comments

2 responses to “नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है”

  1. Rajneesh Kannaujiya Avatar
    Rajneesh Kannaujiya

    Kya शायरी kahi aapne

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