ashmita, Author at Saavan's Posts

जब होगा दीदार रब का

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं »

कोई क्या कहता है

कोई क्या कहता है परवाह किसे है आंखे जब मुहब्बत से रोशन है तो रातो दिन की फिक्र किसे है »

वह दर्द बीनती है

वह दर्द बीनती है टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से राह तकती झुर्रियों से चूल्हा फूँकती साँसों से फुनगियों पर लटके सपनों से न जाने कहाँ कहाँ से और सजा देती है करीने से अगल बगल … हर दर्द को उलट पुलटकर दिखाती है इसे देखिये यह भी दर्द की एक किस्म है यह रोज़गार के लिए शहर गए लोगों के घरों में मिलता है .. यह मौसम के प्रकोप में मिलता है … यह धराशाई हुई फसलों में मिलता है … यह दर्द गरीब किसान... »

हमारे हर लम्हे की कोशिश

हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे »

मुझे बारिश में भीगना पसंद था

मुझे बारिश में भीगना पसंद था, तम्हें बारिश से बचना… तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले। मैं बक-बक करती रहती। बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता। तुम्हें चाँद पसंद था, मुझे उगता सूरज। पर दोनों एक-दूजे की आँखों में कई शामें पार कर लेते। मुझे हमेशा से पसंद थीं बेतरतीब बातें और तुम्हें करीने से रखे हर्फ़। सच! कितने अलग थे हम.. फ़िर भी कितने एक-से। »

धूल मेँ लिपटा माज़ी

जब चलते-चलते थक जाओ तो कुछ देर ही सही थाम लेना पैरोँ के पहिए.. बहाने से उतर जाना पल दो पल ज़िन्दगी की साइकल से.. देखना ग़ौर से मुड़कर कहीँ बहुत पीछे तो नहीँ छूट गया ना.. धूल मेँ लिपटा माज़ी…. »

प्रेम कविता

प्रेम कवितासबने प्रेम पर जाने क्या-क्या लिखा फ़िर भी अधूरी ही रही हर प्रेम कविता »

सावन स्पेशल

बदरा घिर घिर आयी देखो अम्बर के अंसुअन बरसे है कोई न जाने पीर ह्रदय की पी के मिलन को हिय तरसे है यह मधुमास यूँ बीत न जाये नैनों से झरता सावन है जब से पत्र तुम्हारा आया भीगा भीगा सा तन मन है »

और एक दिन

और एक दिन दे दिये शब्द सारी व्यथाओं को लिख डाली एक कविता अपनी पहली कविता … »

कभी लहरों को गौर से देखा है

समंदर के किनारे बैठे कभी लहरों को गौर से देखा है एक दूसरे से होड़ लगाते हुए .. हर लहर तेज़ी से बढ़कर … कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती फेनिल सपनों के निशाँ छोड़ – लौट आती – और आती हुई लहर दूने जोश से उसे काटती हुई आगे बढ़ जाती लेकिन यथा शक्ति प्रयत्न के बाद वह भी थककर लौट आती .बिलकुल हमारी बहस की तरह !!!!! »

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