न तुम हो न हम हैं

न तुम हो न हम हैं
फिर भी वो एहसास हर दम है,

इशारों से बातें करना,
मंद-मंद न चाह के भी मुस्कुराना,
तेरी हर एक हलचल को
मुझे तेरे करीब लाना,
जिंदगी आज कुछ इस तरह से ही संग है

न तुम हो न हम हैं
फिर भी वो एहसास हर दम है

कभी ज़ोर से चिल्लाना
फिर मन ही मन उस गुस्से से दुखी हो जाना,
हँसते-हँसते आँखों का नम हो जाना
तेरे प्यार की ताक़त हर पल मेरे संग है

न तुम हो न हम हैं
फिर भी वो एहसास हर दम है

बार-बार बिखरना और फिर संभलना
रिश्ते की मजबूती को बखूबी ढंग से समझना
लड़ के झगड़ के भी याद सिर्फ एक दूसरे को करना
प्यार को निभाने का तुझमे बखूबी ढंग है

तू नहीं रहेगा तो क्या फर्क पड़ेगा
वो झगडे वाला प्यार होगा
बस इसी बात का ही थोड़ा हर्ज़ होगा
वो यादें हमेशा मेरे प्यार को जिन्दा रखेंगी
बस उन्ही यादों के सहारे तेरा और मेरा मरते दम तक संग होगा

न तुम होगे, न हम होंगे
फिर भी वो एहसास हर दम होगा

– मनीष

Comments

2 responses to “न तुम हो न हम हैं”

  1. राम नरेशपुरवाला

    वाह

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