( पगली लड़की / 2 )
नटखट चंचल नजरो से
बाते वह मुझसे करती हैं
बात बात में वह मुझसे
मेरे सपनो को चुराती हैं
ऑखे बन्द करता हूँ तो
पगली लड़की सामने आ जाती हैं
नयन भी उसके करे कमाल
छुप – छुप कर देखा करती हैं
ये बेचैनी भी ना जाने क्यो
उसको देख कर बढ जाती हैं
जब बाते ना होती हैं उससे
ये दिल ना जाने क्यों खोया रहता हैं
मेरा मन ना जाने क्यों
कितने ख्वाबो में गोता लगता हैं
महेश गुप्ता जौनपुरी
05/03/2017
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