महेश गुप्ता जौनपुरी, Author at Saavan's Posts

मुक्तक

मन्दिर बांटा मस्जिद बांटा बांट दिया संसार, बोली भाषा रहन सहन बांट दिया इंसान , जाति धर्म मजहब बांट दिया भगवान , ईश्वर अल्ला का धर्म बताकर कर दिया सत्यानाश , महेश गुप्ता जौनपुरी »

सरकार को आईना

आये दिन सांसद में कोई ना कोई बिल पारित हो रहा है जिसमें जनता के ऊपर नकेल कसने के लिए कुछ ना कुछ फेर बदल किया जा रहा है । सरकार जनता को आईना दिखाने में नहीं चुकती भोली भाली जनता का फायदा उठाकर सरकारी बाबू भी जनता को गुमराह करके पैसे ऐंठते नजर आ ही जाते हैं तमाम प्रकार की समस्या जनहित में विकराल रूप धारण कर रही है । उन सभी में से एक समस्या चलान है चालान के नाम पर जो ट्रैफिक नियम सुधारने का प्रयास कर... »

विकास के भरोसे

विकास के भरोसे कब तक रोटी सेंकोगें मैली मैली गंगा मईया कब तक तुम बोलोगे राजनीति के पहिए का वीरों तुम इलाज करो गंगा के अभियान को जन जन तक प्रसार करो धनुष बाण टांगें कब तक कंधा तुम ढुढ़ोगे राम के शस्त्र का मर्यादा कब तक भूलोंगे अपनी गलती कब तक एक दुसरो पर ठेलोग लक्ष्य साधकर गंगा का कब तक तुम जियोगे कमर कसो इतिहास रचो गंगा को साफ करो घर घर अलख जगाकर अब तो इंसाफ करो अपने अंदर का रावन दहन कर हार को स्व... »

चन्द्रयान

हौसले कि उड़ान अभी बाकी है , मेरे जज़्बातों का ख्याल अभी बाकी है , चन्दा मामा हम फिर से आयेंगे , अभी मेरे दिल का हाल बाकी है , महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुम्बई विजय सिंह केश पर मेरा कविता

सिधे साधे पर रोब दिखाकर साबित तुमने कर ही दिया बेगुनाह को पीट पीट कर सुपुर्द खाक कर ही दिया क्या न्याय की उम्मीद करें अब भ्रष्ट कानून के वर्दीधारी से गुंडागर्दी फैल चुका है अब न्याय के अधिकारी में अंधा कानून का पाठ पढ़ाकर दांत चियार कर हंस ही दिया विजय को कस्टडी में लेकर भड़ास अपना निकाल ही लिया नहीं किया था कत्ल किसी का ना चोरी ना छिनारा बेबुनियादी इल्जाम लगाया मनबढ़ बिगड़ी औलादों ने सत्य पर रहकर... »

मैं अंधभक्त बना रहा

मैं अंधभक्त बना रहा चीख पुकार को सुनता रहा एकता का गुणगान करता रहा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई भाई भाई करता रहा खून के छींटों पर आंख मूंद चलता रहा मैं अंधभक्त बना रहा मैं अंधभक्त बना रहा अपने अंदर का ज़मीर मैं मारता रहा डर भय से गड़गड़ा कर कांपता रहा घड़ीयाली मगरमच्छ आंसू यूं ही बहाता रहा वेगुनाह के लाश पर फूलों का गुच्छा चढ़ाता रहा मैं अंधभक्त बना रहा मैं अंधभक्त बना रहा आस पड़ोस की घटनाओं से मैं सहमा... »

बर्बाद इश्क

बर्बाद इश्क

वो इश्क के चक्कर में लाइलाज बैठे थे करके इंग्लिश में पी एच डी बर्बाद बैठे थे चौराहे के राहों में पलकें बिछा कर बैठे थे प्यार के चक्कर में उनके इंतजार में बैठे थे बड़ी उम्मीद थी उनको अपने प्यार के भरोसे पर वो वेवफा निकली सर से पांव तक लेकर प्यार की गम में सारी डिग्रियां धरी रह गई जिसे जी जान से चाहा बिना मिले चली गई यूं ही नहीं कोई बाबरा दिल लगाता है किसी से कोई गहरी प्यार की प्रतिक्रिया मिली होगी ... »

हवा

वसंती आयी वसंती आयी देखो देखो वसंती आयी साथ में हरियाली लायी फूलों की महक लायी भौरो को संग लेकर आयी ओंस की बूदो को लायी घर ऑगन को महकायी वसंत आयी वसंती आयी देखो देखो वसंती आयी कोयल की कूक सुनायी मौसम ने ली अगड़ायी सर-सर-सर हवा आयी जीवन में खुशीया लायी वसंत ने जादुई छड़ी घुमायी पतछड़ दुम दबाकर भागी वसंती आयी वसंती आयी देखो देखो वसंती आयी हरियाली का डेरा लायी मौसम बड़ा सुनहरा लायी रंग बिरंगे फूल खिल... »

मुक्तक

मुक्तक

धड़ाधड़ अंधाधुन हो रहा पेड़ों की कटाई, मूक बाधिर बने रहे तनिक लाज नहीं आई, सूलग रहा आरे आज राजनीति के करतुतो से, पर्यावरण प्रेमी को दबोच रहें हैं आरे कालोनी से, महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव महेश गुप्ता जौनपुरी »

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