महेश गुप्ता जौनपुरी, Author at Saavan's Posts

सच में सब कुछ बदल गया

सच में सब कुछ बदल गया इंसान का जुबान बदल गया राजाओ की कहानी बदल गया अल्हड़ मदमस्त जवानी बदल गया यारो की यारी बदल गया फितरत होश जिन्दगी बदल गया सच में बहुत कुछ बदल गया रहने का तरिका बदल गया स्वभाव तौर तरिका बदल गया संस्कार का लिहाज बदल गया अदब बडप्पन बदल गया जुबान का स्वाद बदल गया सच में बहुत कुछ बदल गया प्रकृति का हाल बदल गया इंसान का चाल बदल गया नौजवान का संस्कार बदल गया नीम का कड़वा स्वाद बदल गय... »

प्रकृति धरोहर

प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं हरियाली खेतो की सुन्दर छवि निहारती मदमस्त मयूरा नाचे वर्षा के संग बादल बरसे हरियाली के ऑगन में चिड़िया करे बसेरा छम छम की झंकार लिए आता हैं वसन्त का मेला महेश गुप्ता जौनपुरी »

वायु मानव

संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या जाता हैं मैं काट रहा हूँ पेड़ तो स्थिर हो गयी वायुमान त्राही त्राही मच गया सॉस लेना भी मुश्किल हो गया वायु कि जरुरत पड़ने लगी खिलखिलाकर वायु ने बोला मेरा कुछ नहीं जाता हैं हे मानव प्यारे सोच विचार लो तुम अपनी जीवन कि बगिया को पेड़ ... »

नवजीवन का राग

नवजीवन का राग/03 ज्ञान का प्रकाश तुम धैर्य रख जलाये चलो अग्यानता को दुर कर साक्षरता बढाये चलो दिन क्या रात क्या खुशी के गीत गाये चलो अंधकार से प्रकाश में जीत का जश्न मनाये चलो प्रीत का गीत सदा निर्भय हो गुनगुनाये चलो डर भय अधंकार को प्रकाश से जलाये चलो चीर हो साहस का नज्म हो प्यार का चन्द्र रवि के किरणो से मनोबल बढा़ये चलो नीत वसुधा को प्रणाम कर तिलक मिट्टी का लगाये चलो आदम्य साहस के बल पर वसुधा क... »

नन्हा सा परिन्दा

नन्हा सा परिन्दा एक नन्हा सा परिन्दा खोज रहा हैं आसमान… अपने हौसले से उड़ान भर देखना चाहता हैं आसमान… छोटे छोटे ऑखो से देखना चाहता हैं प्रकृति की खूबसूरती को महसूस करना चाहता हैं अपने पंखो से आसमान की ऊँचाई को एक छोटा सा नन्हा परिन्दा अपने हौसले से बनाना चाहता हैं घोसला बगिया की मनमोहक लताएँ सर सर करती बगिया की हवाएँ झुम झुम कर गाना चाहता हैं वंसती का स्वागत करके एक नन्हा सा परिन्दा खे... »

पढ़ी लिखी प्रिये….

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम रहिश जादी पैसे की बेटी मैं वेवस लाचार किसान का बेटा तुम हर बात को पैसे से तौलती मैं जज्बात का संस्कार प्रिये शौक तुम्हारे लम्बे चौड़े मेरा कुछ शौक नहीं हैं तुम कोका कोला पिज्जा खाती मैं छाछ चना पर करता गुजारा तुम शहरो की हो... »

सुबह कि लालिमा

सुबह की लालिमा सुबह सुबह सूर्य की लालिमा मुझसे कुछ कहती हैं भोर हुआ जग जा प्यारे चिड़िया ची – ची करती हैं नदियाँ झरना जंगल के बुटे सबसे अनोखे से लगते हैं ओंस की खिलखिलाती बूँद वसुधा को जब स्पर्श करती हैं मोती जैसे चमक जाती ओंस की सुनहरी बूँदे जिवन्त हो जाती पुष्प लतायें जब प्रकृति रस का पान हैं करती फूलो पर मड़राते भौरे प्रेम का इजहार हैं करते महेश गुप्ता जौनपुरी »

मैं भारती हूँ

मैं भारती हूँ मैं भारत देश का वासी हूँ वन्दन सबसे करता हूँ देश हित के लिए शीश अर्पित करता हूँ हिन्दू हूँ हिन्दी हैं पहचान राष्ट्र का सेवा करता हूँ धर्म कर्म की बात ना करके देश पर मर मिटता हूँ गर्व हैं तिरंगा पर मुझको जय हिन्द जय हिन्द गाता हूँ मस्त हूँ मतवाला हूँ सुर्य सा चमकता हूँ माथे पर लगा चन्दन तिलक जय श्री राम कहता हूँ महेश गुप्ता जौनपुरी »

किसान

किसान हाँ मैं ही हूँ किसान साहब जो खोतो में काम करता हैं बैल को भाई मानता खेत को धरती माता हल को पालन हार मानता जीवन को खेत में निकाल देता शहर से कोशो दुर हूँ मैं खेत में मैं लीन हूँ आपके जैसी शान नहीं हैं मेरी फिर भी तुम कर्जदार हो मेरे चुभन होती हैं साहब मुझको भी जब कोई मजदूर बोलता हैं मजदूर नहीं हूँ मैं किसान हूँ देश का प्रधान सेवक हूँ मुझे नहीं आती चापलुसी नहीं मिलती खबर अखबार की खेतो में लगा ... »

लघुकथा

( लघुकथा ) एक गरीब महिला अपने परिवार के साथ एक टुटी झोपड़ी में रहती थी उसके परिवार में एक बेटी और एक बेटा था | उसकी माँ पास के गॉव में जाकर झाडू पोछा करके कुछ खाने कि चीजे लाती थी उसमें भी खाना सिर्फ दो लोगो को होता कभी माँ भूखी सो जाती थी तो कभी बेटा यह बोलकर सो जाता था कि माँ आज मुझे बिल्कुल भूख नहीं हैं | जैसे तैसे गरीब महिला का घर चल रहा था एक दिन रात को बहुत ही भयंकर ऑधी तूफान आया उसमें गरीब ... »

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