पता

एक मासूम सी ज़िन्दगी को यूँ दगा दे गई,
उड़ाकर खुशियाँ सारी गमों को सजा दे गई,

कहते हैं जो मरहम लगाने आई थी वो यारों,
बेवजह वही ज़ख्मो को खुल के हवा दे गई,

चाँद तारों भरी कायनात ने बताया मुझको,
एक जुगनू भरी रात थी तुम्हारा पता दे गई,

बनाके खड़ी की मोहब्बत में इमारतें जिसने,
उसी के घर को राही ये दुनियां क्या दे गई।।

राही अंजाना

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