पर्व सबका ये दीपावली का रहे

घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे ।
चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे ।

जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी
पर्व सबका ये दीपावली का रहे ।

 

घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें प्यार से ,
हर तरफ सिलसिला दोस्ती का रहे ।

आओ दें एक दूजे को शुभकामना ,
दौर सबके लिए उन्नती का रहे ।

ऐसी दीवाली हो अब दुआ कीजिये ,
सबके दिल में तसव्वुर ख़ुशी का रहे ।

नीरज मिश्रा

Comments

7 responses to “पर्व सबका ये दीपावली का रहे”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    nice poem Neeraj

  2. Anjali Gupta Avatar
    Anjali Gupta

    nice poem… Happy Diwal!

  3. Kapil Singh Avatar
    Kapil Singh

    हर लफ़्ज इक आईना है, इक दुआ है, इक ख्याल है, इक रोशनी है जिसे हर तरफ़ देखने की ख्वाहिश है…शानदार कविता

  4. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    nice poetry friend

  5. Pankaj Soni Avatar
    Pankaj Soni

    Niceeeee poemm….bro

  6. राम नरेशपुरवाला

    Good

  7. Satish Pandey

    अतिसुन्दर

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