पहली बारिश मे टहलना

पहली बारिश मे टहलना….
देखना कभी शाम ढलना…
तितलियों के पर पकड़ना….
ख्वाब का आँखो मे पलना..
बात छोटी है
मगर मायने रखती है….
रूठे बच्चे को मनाना….
दर्द मे भी मुस्कुराना…
काँच रस्ते से हटाना…
हो अँधेरा लौ जलाना….
बात छोटी है
मगर मायने रखती है…
हाथ गिरते को बढ़ाना…
रोते इंसा को हसाना…
सच को चुनना
सच सुनाना….
बात छोटी है
मगर मायने रखती है….

– लवराज

Comments

One response to “पहली बारिश मे टहलना”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना

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