पूस माह में सावन आया,
काली घनघोर घटाएँ लाया।
झमाझम मेघों से बरसा पानी,
कुदरत को ऐसे सावन भाया ।
सर्दी में सर्दी और बढ़ी,
जलधर इतना जल कहाँ से लाया।
यह कैसा परिवर्तन ऋतु का,
देखो पूस में सावन आया।
भीगा गगन और भीगी वसुंधरा,
हर वृक्ष का हर पल्लव नहाया।
ना जाने क्या समाया है प्रकृति के मन में,
जो पूस माह में सावन आया॥
_______✍गीता
पूस माह में सावन आया

Comments
2 responses to “पूस माह में सावन आया”
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बेहद खूबसूरत सृजन दीदी मां*🙏
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धन्यवाद बहन
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