फुरसतों के पल
न जाने हैं कहाँ आजकल
गर वो होते तो हमें
मिलते जरा मुश्किल के हल।
खूब बारिश हो चुकी
सूखे पड़े हैं जल के नल,
आज जो भी न हो
प्रातः होनी ही है कल।
प्रातः होनी ही है कल
Comments
One response to “प्रातः होनी ही है कल”
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बहुत खूब सुन्दर पंक्तियाँ
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