सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का।
लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।।
धरती भी रंगीन है
अम्बर भी रंगीन है।
नवल कुसुम संग पत्र नवल है
सुरभित जगत नवीन है।।
नफरत की होलिका जला विनयचंद
प्रेम प्रज्वलित आग का।।
सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का।
लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।।
धरती भी रंगीन है
अम्बर भी रंगीन है।
नवल कुसुम संग पत्र नवल है
सुरभित जगत नवीन है।।
नफरत की होलिका जला विनयचंद
प्रेम प्रज्वलित आग का।।