Tag: रंगों पर कविता

  • होली का रंग बस लाल है

    आज की होली का रंग बस लाल है
    यह खून है या गुलाल है

    दिल वालों का शहर आज वीरान है
    लोगों के पागलपन देखों रोटी कीमती और सस्ती अभी जान है

    मौत पर आज तुम्हारे धर्म पर राजनीती होती है
    हिंदु मरता है या मुसलमान कोई नहीं देखता मरता है तोह सिर्फ इंसानियत

    जिसने खोया वही जाने अपनो को खोना क्या होता है
    शासनतंत्र के लोग जो भड़काते है उन्हें पता है निष्पक्ष जांच इस देश में मज़ाक बन चुकी है

    ना रोज़गार है ना मुलभुत अव्यसकताएँ बस आपस में लड़ों और मरो
    हिन्दू राष्ट्र तोह बन जायेगा पढ़ उसमे हिन्दू कम
    ब्राह्मण कायस्थ सूद्र लड़े पढ़े होंगे

  • हुड़दंग करेगे होली में

    फिर आज गुलालों के खातिर
    बदरंग बनेगे होली में ।
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली में ।।

    न जानेगे कितने रंग नये
    चेहरों पर खिल जायेगे ।
    न जाने कितने टूटेंगे
    कितने दिल जुड़ जायेगे
    कितनो को तो तन्हा आकर
    तंग करेगे होली में
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली मे।।2

    कुछ नये मुबारक आयेगे
    चाहत मे रंग लाने को
    कुछ दूर बहुत हो जायेगे
    यादो में तड़पाने को
    भींग किसी की बारिस में
    कुछ दंग करेगे होली में
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली में ।।3

    क्या सच्चा है इस जीवन में
    रंग कौन सा झूठा है
    पर प्यार में दिल से न खेलें
    इस प्यार का रंग अनूठा है
    कुछ आँशू भी तो बरसेंगे
    बेरंग बहेंगे होली में
    अंग अंग पर रंग सजा
    हुड़दंग करेगे होली मेँ।।4

    ✍रकमिश सुल्तानपुरी
    सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

  • हिन्दी होली गीत – मत तरसाओ ना |

    हिन्दी होली गीत – मत तरसाओ ना |
    होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
    मुझे मत तरसाओ ना |
    अबकी फागुन तुमको लगाएंगे रंग |
    मुझे मत तड़पाओ ना |
    गोरे गालो गुलाल लगाएंगे हम सारा |
    रंग देंगे कोरी चुनरिया गोरी हम तुम्हारा |
    डलवा लो रंग अबकी तुम रानी ,
    मत छिप जाओ ना |
    होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
    मुझे मत तरसाओ ना |
    आओ खेले होली दोनों खेल रहा जमाना |
    बच ना पाओगी हमसे मत बनाओ बहाना |
    भर लेंगे बाहो मे तुमको जानी |
    तुम मत इठलाओ ना |
    होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
    मुझे मत तरसाओ ना |
    मस्ती मे झूमे होली हम खेले संग |
    चुनरी भिंगा लो चोली रंगा लो रंग |
    संतोष भारती का यही है कहना |
    जालिम दिल ना जलाओ ना |
    होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
    मुझे मत तरसाओ ना |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

    मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

  • खेल रंग वाला

    सजनी है गौर और
    सजना क्यों काला?
    आओ हम खेलें
    खेल रंग रंग वाला।
    लाल से रंग दो
    हरे से रंग दो।
    नीला और पीला
    गुलाबी से रंग दो।
    रंग डालो अज बेनीआहपीनाला।
    आओ हम खेलें खेल रंग वाला।।
    तन को रंगो सब दिलवर के रंग से।
    मन को रंगो आज प्रेम के रंग से।।
    विनयचंद मिटा दे भाव नफरत वाला।
    आओ हम खेलें खेल रंग वाला।।

  • भोजपुरी होली गीत 2-हमके फगुनवा मे

    भोजपुरी होली गीत 2-हमके फगुनवा मे |
    हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
    तोहार रंग देईब ओढनी मारी पिचकरिया |
    हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
    खेलबू नाही होरी त करब बलजोरी |
    आवा खेला होरी बना जनी रानी भोरी |
    मना जे करबू त बेकार होई उमरिया |
    हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
    रंगवा लगाइब तोहके अबिरवा लगाइब |
    भरी अंकवरिया तोहके गरवा लगाईब |
    तू हउ राधा मोर हम हई सावरिया |
    हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
    आईल फगुनवा बहे फगुनी बयार हो |
    मस्त महीनवा बढ़े हमरो प्यार हो |
    तोहरे पर लागल गोरी हमरो नजरिया |
    हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

    मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

  • भोजपुरी होली गीत 1-सगरो फगुनिया |

    भोजपुरी होली गीत 1-सगरो फगुनिया |
    आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |
    देखा चढ़ल सबके सगरो फगुनिया |
    रंगे केहु गाल गुलाबी |
    केहु रंगे बाल शराबी |
    रंगवा लगाला ना होई खराबी |
    रंगवा हउवे प्रेमवा के चाबी |
    बोला गोरी रंग देई तोहरो ओढ़निया |
    आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |
    चढ़ल केहु पर फागुन क नसा |
    चढ़ल केहु पर होली क नसा |
    चढ़ल केहु पर सजनी क नसा |
    महकल काहे फागुन गोरी तोहरो जवनिया |
    आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |
    केहु खेले होरी भर पिचकारी |
    गुलाल उढ़ावे केहु झोरी झारी |
    केहु बजावे झाल मंजीरा |
    केहु गावे झूमी खूब जोगिरा |
    मन करे रंग देई गोरी तोहरो नथुनीया |
    आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

    मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

  • भोजपुरी होली गीत 3-मस्त फागुन |

    भोजपुरी होली गीत 3-मस्त फागुन |
    आया है मस्त फागुन
    उड़ती है तेरी चुनरिया |
    सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |
    तुझे रंग लगाऊँगा मै हर हाल मे |
    होली खूब खेलूँगा आज मै |
    चलो मनाए फागुन |
    आया है मस्त फागुन
    उड़ती है तेरी चुनरिया |
    सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |
    बागो बहारों कलियाँ खिलने लगी |
    फागुन महीने गोरी मचलने लगी |
    गोरी तू अन्जान मत बन |
    आया है मस्त फागुन
    उड़ती है तेरी चुनरिया |
    सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |
    तेरी अंगड़ाई मन बहकने लगा है |
    खेलूँगा होली दिल मचनले लगा है |
    संतोष भारती है तेरा सजन |
    आया है मस्त फागुन
    उड़ती है तेरी चुनरिया |
    सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

    मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

  • भोजपुरी होली 10- अपना सजनवा रे |

    भोजपुरी होली 10- अपना सजनवा रे |
    उनके चढ़ल बाड़े मस्त फगुनवा रे |
    गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
    फागुन मे गोरिया के चढ़ल बाड़े मस्ती |
    मिलतू तू बहिया मे भरती |
    होलिया मे बहकल जोबनवा रे |
    गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
    चढ़ते फगुनवा उनकर गदरल जवनिया |
    फगुनी बयार उनकर फरकल बदनिया |
    खेले होली संग पियवा अंगनवा रे |
    गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
    नेहिया लगाके काहे कइलू दगाबाजी |
    होलिया मे सईया संगे करेलु कलाबाजी |
    देखि देखि भारती छछने परनवा रे |
    गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
    उनके चढ़ल बाड़े मस्त फगुनवा रे |
    गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

    मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

  • फाग

    सुमधुर ध्वनि मुखरित है होली के राग का।
    लो आ गया भैया महीना रंग बिरंगी फाग का।।
    धरती भी रंगीन है
    अम्बर भी रंगीन है।
    नवल कुसुम संग पत्र नवल है
    सुरभित जगत नवीन है।।
    नफरत की होलिका जला विनयचंद
    प्रेम प्रज्वलित आग का।।

  • खूब खेली मोहन मेरे दिल से होली

    खूब खेली मोहन
    मेरे दिल से होली
    नैनों से नींदो की
    कर ली है चोरी
    तुझसे मिलने पहले
    मैं थी चित् कोरी
    अब चित मेरा तुझ में
    ना मिले कोई ठोरी
    तू आकर मिले ना
    क्यों मुझसे कठोरी
    खूब खेली मोहन
    मेरे दिल से होली
    पहले तुम ने बांधी थी
    प्रेम की यह डोरी
    अब रह ना सके तुम बिन
    यह ब्रज की छोरी
    सुधे मार्ग जाती थी मैं तो
    बुलाते थे तुम ही
    कहे राधा भोली
    खूब खेली मोहन
    मेरे दिल से होली
    कहती है सखीयाँ
    मोय मोहन दिखोरी
    तू तू करे है प्रेम
    तो काहे तोहे ना दिखोरी
    मेरा बनाके मजाक
    तुम सताती हो क्यों री
    जहां बसे श्याम वहां
    रहती है किशोरी

  • होली

    होली
    ——
    रंग भरे ख्वाब से,
    हाथ में गुलाल है।

    श्याम रंग में भीगने को
    राधा बेकरार है।

    नटखट कान्हा तेरी
    बांसुरी से प्यार है।

    बांसुरी के स्वरों में
    प्रेम का मनुहार है।

    फूलों की डोली ,
    रंगो की होली।

    कितनी मधुर लागे
    कान्हा प्रेम की बोली।

    हाथ में गुलाल है,
    मुख शर्म से लाल है।

    बोलियां बतिया तेरी ,
    बड़ी मजेदार है।

    रसिक बड़ा छलिया है,
    कान्हा तू मन बसिया है।

    तेरे रंग में रंग गई में,
    आज तो राधेकृष्णा बन गई मैं।

    निमिषा सिंघल

  • भोजपुरी होली 9 – कारी केसिया के झार |

    भोजपुरी होली 9 – कारी केसिया के झार |
    बहे लागल फागुनी बयार |
    मह मह महके अमवा मोजरवा |
    छन छन छनके महुआ के कोचवा |
    अईले नाही सईया तोहार |
    गोरिया कारी केसिया के झार |
    पियर सरसो फुला गईली |
    हरियर मटर गदराई गईली |
    झीनी झीनी बहे पुरवा बयार |
    गोरिया कारी केसिया के झार |
    बैरी पवनवा दरदिया बढ़ावे बदनवा |
    महुआ के कोचवा चुएला मदनवा |
    सजनी चले अचरा के उड़ाय |
    गोरिया कारी केसिया के झार |
    फुलवा फुला गईले भवरा लोभाई गईले |
    चढ़ते फगुनवा सजनवा कोहाई गईले |
    सजनी करेली सोरहो सिंगार |
    गोरिया कारी केसिया के झार |
    बहे लागल फागुनी बयार |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

    मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

  • भोजपुरी होली 8–सड़िया ले अइह |

    भोजपुरी होली 8–सड़िया ले अइह |
    सड़िया ले अइह लाल लाल |
    ये सइया आ गईले फगुनवा |
    होलिया मे रंगब तोहरो गाल |
    ये सइया आ गईले फगुनवा |
    सड़िया के संगवा लाल चुनार ले अइह|
    औरी ले अइह चूड़िया लाल लाल |
    ये सइया आ गईले फगुनवा |
    गुलाल ले अइहा सईया अबीरवो ले अइह |
    रंगवा ले अइह लाल लाल |
    ये सइया आ गईले फगुनवा |
    कंगना ले अइह सईया कनबलिया ले अइह |
    टिकुली ले अइह लाल लाल |
    ये सइया आ गईले फगुनवा |
    सड़िया ले अइह लाल लाल |
    ये सइया आ गईले फगुनवा |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • भोजपुरी होली 7– आज भारत मे होली |

    भोजपुरी होली 7– आज भारत मे होली |
    आज भारत मे होली रे सखिया |
    सिमवा चलावे जवान गोली रे सखिया |
    आज भारत मे होली रे सखिया |
    केकर मजाल भारत अँखिया देखावे |
    झट से जवान उनकर नसिया दबावे |
    सिमवा पर खेले भर झोरी रे सखिया |
    आज भारत मे होली रे सखिया |
    जब केहु ललकारे देश के जवनवा |
    मारी दुशमनवा उनकर हरी लेले परनवा |
    होलिया खेले ले मारी गोली रे सखिया |
    आज भारत मे होली रे सखिया |
    जीती के जंगवा खेले रंग पिचकरिया |
    देशवा के होली देखि दुशमन फाटल नजरिया |
    खुनवा से खेले बीर होली रे सखिया |
    आज भारत मे होली रे सखिया |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • भोजपुरी होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |

    भोजपुरी होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    मोदी जी महनवा छप्पन इंची सिनवा |
    बदले देशवा के तकदीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    जबसे ई भईले प्रधान मंत्री देशवा |
    आगे टीके नाही केवनों बलबीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    जब जब ललकारे पापी पाकिस्तनवा |
    मारी देले ओकरा के शमशीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    होला जय जयकार भारत के जमनवा |
    बांधी दीहले दुशमन के जंजीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    अमित साह खेले खोली मशीनगनवा |
    होलिया खिलावे सेना पूरी औरी खीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |

    भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    कहे गौरा भोला भंगिया पिये ना जा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    पीना जो होतो भोला लस्सी तू पिला |
    आके अबीर गुललवा लगा जा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    खाना जो हो तो खीर पूड़ी तू खा जा |
    जहर धतुरवा ना खा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    खेलना जो हो होरी गौरा संग खेला |
    गणेश कार्तिक के रंगवा तू दे दा लगा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    लगाना हो समाधि तो कैलास पर लगावा |
    भूतवन बैतलवन होरी खेले तू कहा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली

    भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    हरदम करे उ बलजोरी |
    जब हम जाई जमुना किनरवा |
    देले मोर मटकी के फोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई फूल लोढ़े बगिया |
    खींचे मोर अँचरा के कोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई यमुना के बिचवा |
    करे मोर सड़िया के चोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई ब्रिन्दा रे बनवा |
    बंसिया बजाई नचावे राधा गोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई दहिया लेईके बज़रिआ |
    कहे चला कदमवा के ओरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • होली

    हमें नहीं पता तुम्हें नहीं पता,
    तू क्यों है लापता खुशनुमा लम्हा।
    क्यों सूख रहा है वह हरा दरख़्त,
    किसे मिलकर सींचा था पहली दफा।
    वो यादें गुमसुम है जहा बोली थी हमने प्यार की बोली,
    उस फिजा की रंगत उड़ी-उड़ी जा खेली थी रंगरेजिया तेरे संग होली।
    निमिषा सिंघल

  • भोजपुरी पारंपरिक होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |

    भोजपुरी पारंपरिक होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    मोदी जी महनवा छप्पन इंची सिनवा |
    बदले देशवा के तकदीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    जबसे ई भईले प्रधान मंत्री देशवा |
    आगे टीके नाही केवनों बलबीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    जब जब ललकारे पापी पाकिस्तनवा |
    मारी देले ओकरा के शमशीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    होला जय जयकार भारत के जमनवा |
    बांधी दीहले दुशमन के जंजीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
    अमित साह खेले खोली मशीनगनवा |
    होलिया खिलावे सेना पूरी औरी खीर |
    दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |

    भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    कहे गौरा भोला भंगिया पिये ना जा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    पीना जो होतो भोला लस्सी तू पिला |
    आके अबीर गुललवा लगा जा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    खाना जो हो तो खीर पूड़ी तू खा जा |
    जहर धतुरवा ना खा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    खेलना जो हो होरी गौरा संग खेला |
    गणेश कार्तिक के रंगवा तू दे दा लगा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |
    लगाना हो समाधि तो कैलास पर लगावा |
    भूतवन बैतलवन होरी खेले तू कहा |
    भोला भंगिया पिये ना जा |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली

    भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    हरदम करे उ बलजोरी |
    जब हम जाई जमुना किनरवा |
    देले मोर मटकी के फोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई फूल लोढ़े बगिया |
    खींचे मोर अँचरा के कोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई यमुना के बिचवा |
    करे मोर सड़िया के चोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई ब्रिन्दा रे बनवा |
    बंसिया बजाई नचावे राधा गोरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
    जब हम जाई दहिया लेईके बज़रिआ |
    कहे चला कदमवा के ओरी |
    सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |

    श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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  • रंग डालेगे

    आपको रंग डालेगे
    हाँथ में रंग है
    पीला।
    पहले सूखा लगायेंगे
    भर के पिचकारी में
    गीला।
    आप जब गुस्से में
    आकर के हमपे
    तिलमिलओगे
    आपका साँवला
    मुखड़ा कर देंगे
    बैंगनी-नीला।

  • होली में

    बजे ढोलक बजे नगमे
    मचे हुढ़दंग होली में
    रंगी धरती रंगा
    अम्बर ।
    उड़े है रंग होली में
    कोई गुब्बारे से खेले
    तो कोई मरे पिचकारी
    पड़ी हैं पान की छींटे
    चढ़े है भंग
    होली में ।

  • शहीदों के घर होली

    होली आई रे, आई रे ,होली आई रे।
    यादों की धूल उड़ाती सी ,
    खूनी मंजर दोहराती सी,
    चहरों की फीकी रंगत पर रंगों का जामा चढ़ाती सी फिर देखो होली आई है।
    मन मस्त नहीं उदासी है, अखियां दर्शन की प्यासी है ,
    चंद सांसों की मोहताजी है ,
    जख्मों की यादें ताजी हैं ।
    गुजिया मठरी रंगीन हुई, आंखें भी सब रंगीन हुईं,
    कड़वी यादें शमशीर हुई ,
    खुशियां धरती में लीन हुई,
    उन सूनी- सूनी अंखियों में,
    बीती होली रंगीन हुई ।
    कुछ हंसी ठिठोली हवाओं में,
    कानों में रस सा घोल गई ।
    हे भगवन ! सूनी सी अंखियों में,
    कुछ होली के रंग भर देना,
    दुख सारे तुम बस हर लेना,
    मुस्कान मधुर तुम दे देना ,मुस्कान मधुर तुम दे देना ।
    निमिषा सिंघल

  • होली

    होली के रंग में हम भिगायेंगे अंग,
    मिल जाये हमें कोई तो लगाएंगे रंग,

    न सोचेंगे न समझेंगे न समझायेंगे हम,
    मिलजाये जो थोड़ी सी तो चढ़ाएंगे भंग,

    घूमेंगे फिरँगे झूमेंगे हम मस्ती में अपनी,
    बस ऐसे ही खुलकर होली मनाएंगे हम।।

    राही अंजाना

  • होली

    छुअन तुम्हारी अँगुलियों की,
    मेरे कपोलों पर, आज भी मौजूद है,
    तुम्हारी आँखों की शरारत मेरी,
    तासीर की हरारत में, आज भी ज़िंदा है,
    तुम तसव्वुर में जवान हो आज भी,
    हमारी मुहब्बत की तरह,
    हर मौसम परवान चढ़ता है रंग तुम्हारा,
    एक ये एहसास ही काफी है मुझे के,
    तुमने मुझे चाहा था कभी अपनी सांस की तरह,
    वक्त गुज़रा हज़ारों सूरज ढल गए,
    तुम्हें पता है क्या…………….
    मैं अभी तक वहीं खड़ी हूँ किसी तस्वीर की तरह,
    होली के दिन तेरी यादों के रंग से भरी,
    मेरी ये तस्वीर मुझे कांच की तरह साफ़ लगती है,
    बस इसलिए हर होली मुझे बहुत ख़ास लगती है……….
    स्वरचित ‘मनीषा नेमा’

  • होली

    जीवन जीना एक कला है
    प्रतिपल एक रंगोली है
    गर मानवता है दिल में तो
    प्रात-रात नित होली है ।।

    वसुधा अंबर में संगम का
    माध्यम दिनकर होता है
    तिल होता है चन्दा में भी
    फिर भी शीतल होता है।।

    विष से व्याप्त भुजंग है होता
    चन्दन की उस डाली पर
    पर शीतलता की वह भाषा
    छाई है हरियाली पर ।।

    स्वाति की उन बून्दों पर
    पपिहा का जीवन होता है
    वह याद उसी को करता है
    और स्वप्न में उसके सोता है।।

    ये त्याग न्योछावर की बातें
    मैं तुमको नहीं बताता हूं
    पर जीवन जीना एक कला है
    मन्त्र तुम्हें बतलाता हूं।।

    जीवन को गर समझ गये तो
    पथ जैसे रंगोली है
    गर मानवता दिल में है तो
    प्रात-रात नित होली है ।।

    अशोक सिंह आज़मगढ़

  • रंग बिरंगी होली

    इस रंग बिरंगी होली की हर बात बहुत ही निराली है,
    जहाँ-जहाँ तक नज़रें जाती, मस्ती की हर तरफ तैयारी है,
    माँ के हाँथ के पकवानों को चखने
    किसी की घर जाने की तैयारी है,
    बचपन को जीवंत कर देने किसी ने
    पिचकारी फिर से थामी है,
    इन सब बात के आनंद में खो जाने की अब बारी है
    इस रंग बिरंगी होली की हर बात ही निराली है

    फिर मुखौटे के पीछे छुपकर,
    शरारत फिर से कर जाने की तैयारी है,
    गुलाल कहकर कड़क रंग से
    रंग देने की फिर से कुछ ने ठानी है,

    होलिका संग अपने मन के मैलों को दहन कर
    कोई नई शुरुआत के लिए उत्साहित है,
    दुश्मनी को भूलकर
    फिर से अबीर के तिलक लगाने की बारी है
    आरंभ करो ख़ुशियों के इस त्यौहार का
    हर बात इसकी बहुत निराली है

    -मनीष

  • होली की शुभकामनायें कविता के अंदाज में

    जरा सा मुस्कुरा?☺ देना होली मानाने से पहेले
    हर गम को जला ??देना होली जलाने से पहेले
    मत सोचना की किस किस ने दिल?? दुखाया है अब तक
    सबको माफ़ ??कर देना रंग लगाने से पहेले
    क्या पता फिर ये मौका?? मिले न मिले
    इसलिए दिल?? को साफ़ कर लेना होली से पहेले
    कहीं यह सन्देश ?? हम से पहेले कोई आप को न भेज दे
    इसलिए होली ????❤ की शुभ कामना ले लीजिये सबसे पहेले

  • शहीदों की होली

    शहीदों की होली

    “एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..”

    रंगों का गुबार धुआँ बन कर,

    उठ रहा है मेरे सीने में…………….

    वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था,

    आज़ादी की जंग में,

    वो रंग जो निकला था आँखों से,

    चिनगारी में,

    वो रंग जिससे लाल हुई थी,

    भारत माता,

    इन्हीं रंगों का गुबार धुआँ बनकर,

    उठ रहा है मेरे सीने में…………….

    रंग जो उपजे थे, उबले थे, बिखरे थे,

    आज़ादी का रंग पाने,

    वो रंग जो शहीदों ने पहने थे,

    सीना ताने,

    उन केसरिया, लाल, सफ़ेद, और काले रंगों को,

    रंगों के उस मौसम को,

    मेरा सलाम…..

    उन नामचीन ‘आज़ादों’, बेनामी किताबों,

    उन वीरांगनाओं, उन ललनाओं,

    थोड़ी सी उन सबलाओं, हज़ारों उन अबलाओं को,

    मेरा सलाम……

    बंटवारे में जो बंट गईं, भूखे पेट दुबक गईं,

    कोड़े खाकर भी जो कराह न सकीं,

    कुएँ में कूद कर भी जो समा न सकीं,

    उन हज़ारों आत्माओं को,

    मेरा सलाम……..

    इतिहास के गर्त से उकेर कर,

    सिली हुई तुरपाइयों से उधेड़ कर,

    निकाली गई, हमें दिखाई गई,

    1947 में आज़ादी के दीवानों की,

    होली की उस उमंग को,

    ‘शहीदों की होली’ की उस कहानी को,

    मेरा सलाम…………..

    स्वरचित ‘मनीषा नेमा’

  • शहीदों की होली

    शहीदों की होली

    “एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..”

    रंगों का गुबार धुआँ बन कर,

    उठ रहा है मेरे सीने में…………….

    वो रंग जो ‘आज़ादों’ ने भरा था,

    आज़ादी की जंग में,

    वो रंग जो निकला था आँखों से,

    चिनगारी में,

    वो रंग जिससे लाल हुई थी,

    भारत माता,

    इन्हीं रंगों का गुबार धुआँ बनकर,

    उठ रहा है मेरे सीने में…………….

    रंग जो उपजे थे, उबले थे, बिखरे थे,

    आज़ादी का रंग पाने,

    वो रंग जो शहीदों ने पहने थे,

    सीना ताने,

    उन केसरिया, लाल, सफ़ेद, और काले रंगों को,

    रंगों के उस मौसम को,

    मेरा सलाम…..

    उन नामचीन ‘आज़ादों’, बेनामी किताबों,

    उन वीरांगनाओं, उन ललनाओं,

    थोड़ी सी उन सबलाओं, हज़ारों उन अबलाओं को,

    मेरा सलाम……

    बंटवारे में जो बंट गईं, भूखे पेट दुबक गईं,

    कोड़े खाकर भी जो कराह न सकीं,

    कुएँ में कूद कर भी जो समा न सकीं,

    उन हज़ारों आत्माओं को,

    मेरा सलाम……..

    इतिहास के गर्त से उकेर कर,

    सिली हुई तुरपाइयों से उधेड़ कर,

    निकाली गई, हमें दिखाई गई,

    1947 में आज़ादी के दीवानों की,

    होली की उस उमंग को,

    ‘शहीदों की होली’ की उस कहानी को,

    मेरा सलाम…………..

    स्वरचित ‘मनीषा नेमा’

  • होली है रंगों का खेल

    होली है रंगों का खेल

    होली है रंगों का खेल

    आवो खेले मिल के खेल

    देखो खेल रही है होली

    ये आसमा ये धरथी हमारी  

    आवो मिल के रंग चुराये

    सबको मिल के रंग लगाए

    रंग सच्चाई का आसमा से लाए

    रंग खुसी का हरयाली से चुराये

    रंग चेतना का सूर्य मे पाये

    रंग प्यार का फूलों से भर आए

    रंग सादगी का चाँद से ले आए

    आवो मिल रंग चुयारे

    सबको मिल के रंग लगाए

    मैं रंग जाऊँ तेरे रंग मैं

    तू मेरा रंग हो जाओ

    ओड़ तुझे मैं

    तन मन मे

    रंग दूँ मैं सारा बंधन

     एक रंग हैं सचाई का

    एक रंग अच्छाई का 

    ———————–

                                                                       -Dinesh Kumar-

  • होली की टोली

    होली पे मस्तों की देखो टोली चली,
    रँगने को एक दूजे की चोली चली,
    भुलाकर गमों के भँवर को भी देखो,
    आज गले से लगाने को दुनीयाँ चली,
    हरे लाल पिले गुलाबी और नीले,
    अबीर रंग खुशयों के उड़ाने चली,
    भरकर पिचकारी गुब्बारे पानी के,
    तन मन को सबके भिगाने ज़माने के,
    हर गली घर से देखो ये दुनियां चली॥
    राही (अंजाना)

  • होली

     

    पलाश की खुशबू लिए होली के रंग,

    भिगो जाते हैं खुशियों की मस्ती में ।

    गुलाल का गुबार भर देता है

    ऑंखों में अल्हड सपने।

    छटा ऐसे लुभाती है….

    कि सूने मन में ,

    पल भर में जीवन की रंगत भर जाती है।

    फिर मिलन की आस लिए रास्ता निहारती,

    अकेली सांझ आती है।

    और यही सोचता है मन ,

    1. कि क्यों होली बरस में एक बार आती है।।।।।
  • आज अवध में होली है और , मैं अशोका बन में

    आज अवध में होली है और , मैं अशोका बन में

    आज अवध में होली है और, मैं अशोका बन में।
    रंग दो मोहे राजा राम , मैं बसी हूँ कन कन में।।

    आँखे रोकर पत्थर हो गयी, आँसू से भरे सागर।
    तुम भी देख लेना साजन, हालत मेरी आकर।।
    छोड़ आई हूँ सासें रसिया, तेरे निज चरणन में।
    आज अवध में होली है और , मैं अशोका बन में॥

    याद आती है मिथला की बोली, और अवध होली।
    छोड़ के अपनी सखी, सहेली , मैं रह गयी अकेली॥
    तेरे दम पर चली थी घर से, बिछड़ गयी कानन में।
    आज अवध में होली है और, मैं अशोका बन में।।

    चित्रकूट के पनघट पर तुम , रंगे थे मोहे रसिया।
    मंदाकिनी की धार में, हम दोनो बहे थे रसिया।।
    बीती बातें याद हैं क्या , अब भी तुम्हारे मन में।
    आज अवध में होली है और , मैं अशोका बन में।।

    पंचवटी में हंसों का जोड़ा, होली में रंग जाता था।
    प्रेम अमर, अमर रहेगा, बसंत गीत गाता था।।
    सुंगध तेरी लेकर आया, वही बसंत, पवन में।
    आज अवध में होली है और, मैं अशोका बन में॥

    जाने क्या सुध थी मेरी कि मैं जिद तुमसे कर बैठी।
    हिरनिया के मोह में राजा, आज मैं इस कदर बैठी।।
    सोचती हूँ मैं भी रसिया, क्यों भटके हम बन में।
    आज अवध में होली है और, मैं अशोका बन में॥

    कितनी होली बिताई है मैंने, तेरी यादों के सहारे।
    सूखा आंचल देखो मेरा, आज तुम्हीं को पुकारे।
    आओ लंका में प्रियतम, कब तक रहूँगी बंधन में।
    आज अवध में होली है और, मैं अशोका बन में॥
    ओमप्रकाश चंदेल “अवसर”
    रानीतराई पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़
    7693919758

  • मजा आ गया होली में

    सभी मित्रोजनो को होली की अग्रिम शुभकामनाये। आप सबों को होली पर
    एक भेट! ******

    प्रेम-रस का रंग बरसाने
    निकली भर के झोली में !
    क्युँ मैं सखियों से बिछङी
    क्या आया रास अकेली में
    ताँक रहे थे पिया गली में।
    धर ले गए खींच दहेली में।
    हाथो को पकङा रंग गालो
    पर रगङा
    मूक रही कुछ न बोली मैं ।
    हाथो को जोङा पैरो को पकङा
    सुनी एक न मेरी हमजोली ने।
    मनभावन मेल लता-तरु सा
    आहा! मजा आ गया होली में!?
    -रमेश
    जय राधे- कृष्ण–

  • होली, रुत पर छा गयी है

    होली, रुत पर छा गयी है

    होली, रुत पर छा गयी।
    मस्तों की टोली आ गयी।।

    लाज़ शरम तुम छोड़ो।
    आज मुख मत मोड़ो।।
    दिल को दिल से जोड़ो।
    झूम कर अब बोलो॥
    होली, रुत पर छा गयी है।
    मस्तों की टोली आ गयी है।।

    यार को गले लगा लो।
    रंग गुलाल उड़ा लो।।
    मनमीत को बुला लो।
    प्रीत से तुम नहा लो।।
    फागुन में मस्ती छा गयी है।
    होली, रुत पर छा गयी है।

    बैठ के फाग गा लो ।
    आज नंगाड़ा बजा लो।।
    गोरी को भी बुला लो।
    गालों पे रंग लगा लो।
    उसकी बोली भा गयी है।
    होली, रुत पर छा गयी है।

    हंसनी को हमें रंगने दो।
    उनके मन में बसने दो।।
    आज दलदल मचने दो।
    प्रेम अब तो बरसने दो॥
    हमें चुनरी भीगी भा गयी है।
    होली, रुत पर छा गयी है॥

    बादल तुम इधर देखो।
    धरती से कुछ तो सीखो।।
    अंतस में तुम रंग भरो।
    आज गुलाबी वर्षा करो।।
    देख हमजोली आ गयी है।
    होली, रुत पर छा गयी है।।
    ओमप्रकाश चंदेल “अवसर”
    रानीतराई पाटन दुर्ग
    छत्तीसगढ़
    7693919758

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