अपने ही घर में क्यों बंटवारे हो गए,
जो अपने थे अपनों से किनारे हो गए,
बहुत शिद्दत से जुड़े थे जो खून के रिश्ते,
दो गज़ ज़मीं की खातिर बे-सहारे हो गए,
जान के प्यारे थे जो एक दूजे के करीब,
दूर मानो जैसे आसमाँ से सितारे हो गए,
खुद ही दिलों में दरारें बनायी हो जिन्होंने,
भला कैसे कह दूँ के वो बेचारे हो गए।।
राही (अंजाना)
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