बच्चों में हैं भगवान

जब बच्चों में हैं भगवान,
फिर क्यों मम्मी पापा खींचे कान
क्योंकि कभी-कभी भगवान,
शैतानी करने लगते हैं,
बन करके नादान
शोर मचाते हैं दिनभर,
चुप हो जाएं तो है इनका एहसान
अपनी मन मर्जी से सोएं-खाएं,
जब मन हो तब उधम मचाएं।
हाथ जुड़वा कर ही दम लेते,
ये तो हैं सचमुच भगवान।।
_____✍️गीता

Comments

8 responses to “बच्चों में हैं भगवान”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  3. Suman Kumari

    अति सुंदर अभिव्यक्ति

    1. धन्यवाद सुमन मैम

  4. Satish Pandey

    हाथ जुड़वा कर ही दम लेते,
    ये तो हैं सचमुच भगवान।।
    — बहुत उम्दा प्रस्तुति

    1. समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

Leave a Reply

New Report

Close