बतला दो

अब तुम्हारी याद आती है,भूलूं कैसे ये बतला दो,
तुम मेरी हो नहीं सकती,समझूँ कैसे ये बतला दो!
वो सपना जो देखा समझा हूँ तेरे साथ रहकर मैं,
हकीकत में नामुमकिन हैं यही मुझको बतला दो!!

Comments

2 responses to “बतला दो”

  1. Abhishek kumar

    Good

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