बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।

बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।
मुसल्सल याद आती है मुलाकातें हमको।।
,
ऐसे क्यूँ ख़फ़ा हो गए बिना सबब के तुम।
क़ोई वजह थी जहन में तो बताते हमकों।।
,
ख़ुद मुज़रिम होके हमें गुनाहगार कह दिया।
अपनी बेगुनाही के सबूत तो दिखाते हमको।।
,
अश्कों की वज़ह बनते है ख़त मेरे अक्सर।
कहतें हो तो फ़िर क्यूँ नहीं जलातें हमकों।।
,
कहना आसान है ओ वादे भी तमाम होते है।
पर क़ोई रिश्ता कहा था तो निभाते हमकों।।
,
जिसे भूलना हो वो याद क्या रखता आखिर।
लेकिन कहता है तारीखें याद दिलाते हमकों।।
@@@@RK@@@@

Comments

5 responses to “बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों।”

  1. Dinesh Avatar

    so nice ., maza aa gaya bhai

    1. Ramesh Singh Avatar
      Ramesh Singh

      Thanks

  2. Abhishek kumar

    Ye baat

  3. nitu kandera

    Ye bat

Leave a Reply

New Report

Close