बात कम हो काम अधिक
तब तो है कुछ बात।
ऐसा क्या प्रचार जो
दिन को बोले रात।
दिन को बोले रात
रात को दिन कहता हो।
तस्वीरों को खींच,
दिखावा ही करता हो।
कहे कलम दिखावा
है सच्चाई पर घात,
पहले कर लो काम
फिर होगी बाकी बात।
बात कम हो काम अधिक
Comments
3 responses to “बात कम हो काम अधिक”
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नेताओं पर कटाक्ष करती हुई और सच्चाई व्यक्त करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर छंद बद्ध रचना… सच्ची अभिव्यक्ति
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अतिसुंदर रचना
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बहुत सुंदर
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