तू ठेस देने वालों से न घबरा
तेरे में हुनर बहुत है,
तेरी लेखनी की धार में
खनक बहुत है।
हवाएं तो आती रहेंगी
जाती रहेंगी,
आँख में रेत का कण डालकर
रुलाती रहेंगी,
लेकिन तू बिंदास भाव से चलती चल
अपने लेखन की धार मजबूत करती चल।
ज़माना कुछ न माने तुझे
लेकिन तेरी लेखनी तेरा परिचय देती है
बिंदास रहने की जरुरत है तुझे .