तू ठेस देने वालों से न घबरा
तेरे में हुनर बहुत है,
तेरी लेखनी की धार में
खनक बहुत है।
हवाएं तो आती रहेंगी
जाती रहेंगी,
आँख में रेत का कण डालकर
रुलाती रहेंगी,
लेकिन तू बिंदास भाव से चलती चल
अपने लेखन की धार मजबूत करती चल।
ज़माना कुछ न माने तुझे
लेकिन तेरी लेखनी तेरा परिचय देती है
बिंदास रहने की जरुरत है तुझे .
बिंदास रहने की जरुरत है तुझे
Comments
10 responses to “बिंदास रहने की जरुरत है तुझे”
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बहुत ही अच्छी
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सादर धन्यवाद जी
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👏👏बहुत सुंदर
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सादर धन्यवाद जी
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जी यह मेरी भावना व्यक्त हो ही गयी
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Thanks
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बहुत सुन्दर भाव
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धन्यवाद जी
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