बिंदास रहने की जरुरत है तुझे

तू ठेस देने वालों से न घबरा
तेरे में हुनर बहुत है,
तेरी लेखनी की धार में
खनक बहुत है।
हवाएं तो आती रहेंगी
जाती रहेंगी,
आँख में रेत का कण डालकर
रुलाती रहेंगी,
लेकिन तू बिंदास भाव से चलती चल
अपने लेखन की धार मजबूत करती चल।
ज़माना कुछ न माने तुझे
लेकिन तेरी लेखनी तेरा परिचय देती है
बिंदास रहने की जरुरत है तुझे .

Comments

10 responses to “बिंदास रहने की जरुरत है तुझे”

  1. बहुत ही अच्छी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    👏👏बहुत सुंदर

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  3. This comment is currently unavailable

    1. Satish Pandey

      जी यह मेरी भावना व्यक्त हो ही गयी

  4. This comment is currently unavailable

  5. बहुत सुन्दर भाव

    1. धन्यवाद जी

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