बीती सुध

बीती सुध ,जो कभी सुखदायक थी ,
आज वो बड़ा रुलाती हैं,
चार दिन की घनी हरियाली थी,
अब पतझड़ बड़ा सताती है।

Comments

2 responses to “बीती सुध”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

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