//बेजा कब्जा// (नवगीत)

नाचत हे परिया

गावत तरिया
घर कुरिया ला, देख बड़े ।

सुन्ना गोदी अब भरे
दिखे आदमी पोठ
अब सब झंझट टूट गे
सुन के गुरतुर गोठ

सब नरवा सगरी
अउ पयडगरी
सड़क शहर के, माथ जड़े ।

सोन मितानी हे बदे,
करिया लोहा संग
कांदी कचरा घाट हा
देखत हे हो दंग

चौरा नंदागे,
पार हरागे
बइला गाड़ी, टूट खड़े ।

छितका कोठा गाय के
पथरा कस भगवान
पैरा भूसा ले उचक
खाय खेत के धान

नाचे हे मनखे
बहुते तनके
खटिया डारे, पाँव खड़े ।।

.रमेश चौहान

Comments

11 responses to “//बेजा कब्जा// (नवगीत)”

    1. ramesh chauhan Avatar
      ramesh chauhan

      छत्तीसगढ़ी नवगीत

      1. ramesh chauhan Avatar
        ramesh chauhan

        छत्तीसगढ़ी नवगीत के ये प्रयास ला सराहे बर आपके अंतस ले आभार

  1. Pragya Shukla

    Good

  2. Kanchan Dwivedi

    Nice

  3. Satish Pandey

    अति सुंदर

Leave a Reply

New Report

Close