भव-बंधन हारे
पार करो अब नईया मेरे
तुझ से ही अब सब कुछ मेरा
मुझमें नहीं रहा अब कुछ तेरा
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भव-बंधन हारे
पार करो अब नईया मेरे ।।1।।
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तुझमें समर्पित मैं,
मुझमें समर्पित तुम,
फिर क्यूँ मन-माया नचाती हमें
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भव-बंधन हारे
पार करो अब नईया मेरे ।।2।।
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हम तुम एक हैं मगर
तुझमे शक्ति है दुनिया की चलानी की,
हम तेरा दास विकास है,
अबकी बार भव-पार कर दो, तुम्हीं गणिका के राम हो ।।
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भव-बंधन हारे
पार करो अब नईया मेरे ।।3।।
राम भक्त विकास कुमार
भव-बंधन हारे
Comments
3 responses to “भव-बंधन हारे”
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सुंदर
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Nice
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बहुत खूब
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