जख़्म तो बहुत दिए तुमने, मगर मलहम लगाना भूल गयी
याद तो रोज आती थी आपको मेरी, लेकिन आँसु बहाना भूल गयी
जब दुनिया में आपके पास कोई न हो तब मुझे बुला लेना
लेकिन तब ये न कहना की तेरा नम्बर सेव करना भूल गयी
भूल गयी
Comments
3 responses to “भूल गयी”
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waah waah
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वाह
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लाजबाव रचना
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