5 Comments

  1. “करे जो पीठ पर, उसे मत वीर कहना…सहारा बेसहारे को
    उसे कहते फरिश्ता सब”
    इस कविता के माध्यम से बहुत ही गहरी बात कही है कवि, सतीश जी ने, पीठ पीछे वार वाले को कदापि वीर नहीं कहा जा सकता। जो मुश्किल वक्त में सहारा दे वही सच्चा इंसान फरिश्ता कहने लायक होता है, अति उत्तम भाव लिए हुए बहुत ही उत्कृष्ट रचना

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