ममता

माँ की ममता का हिसाब कराना मुश्किल है,
दो और दो से ज्यूँ आठ बनाना मुश्किल है,

बिछी हुई है यूँ बिसात यहाँ मानो सम्बंधों की,
जिसमें अपनों पर ही चाल लगाना मुश्किल है,

इंसानों का इंसानों पर राज चलना मुश्किल है,
जानवरों मेंभी प्यारे एहसास छिपाना मुश्किल है।।

राही अंजाना

Comments

3 responses to “ममता”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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