चलो उसी कू-ए-यार में चलतें हैं साकी मय-कदा तो खाली हो गया लगता,
जहाँ शब-ए-सियह में भी उनके हुश्न-ए-जाम के प्याले मिला करते थे ,
मय-कदा
Comments
5 responses to “मय-कदा”
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very nice!!!
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धन्यवाद ….
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Nice one
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Thanks a lot
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गजब
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