यह जापान है
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यह हिंदुस्तान नहीं ,बाबू …
जापान है
जहाँ गुरु ग्राम और
घंटा घड़ियाल नहीं
विज्ञान है
यहाँ आप आज़ाद है
अपने विकास के लिए
उन्नति के प्रयास के लिए
यहाँ नम्रता है
फालतू का दिखावा नहीं
जो है ,वह वास्तविक है
कोई छलावा नही
कोई छुआ छूत नहीं
लोग परजीवी की तरह समाज को चूसते नहीं
हर असफलता और नाकामी के लिए
भगवान को कोसते नहीं
मन्त्र उनका सरल है
बुद्ध को अपनाया है
तर्क को हथियार बनाया है
पूरे वर्ष भगवान को अवकाश रहता है
धरती पर केवल प्रयास रहता है
जब भारत
अंधविश्वास, पाखंड और भाग्यवाद नहीं
विज्ञान बन अपनाएगा
बनारस को क्योटो बनाने की ज़रूरत नहीं होगी
पूरा हिंदुस्तान ही जापान बन जाएगा ।
तेज
Poem written during My recent visit to Japan.
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