मिल्कियत-ए-इश्क

लहू के आसूँ रोना,

बमुश्किल समझ आएगा

किसी से दिल लगा लो बस

तजुर्बा खुद ही मिल जाएगा /

जर्रा-ए-ख़ामोशी में है क्या रक्खा

यहाँ कोई छुप न पाएगा

तलाश-ए-महफ़िल रखो जारी

कातिल मिल ही जाएगा /

अपने गम को गाओगे

बज़्म गमगीन हो जाएगी

किसी सीने से लग के रोना

बड़ा आराम आएगा /

© ― अश्विनी यादव

Comments

7 responses to “मिल्कियत-ए-इश्क”

    1. Ashwini Yadav Avatar

      सादर आभार

  1. Sonit Bopche Avatar
    Sonit Bopche

    wahh.. bahut khoob likha aapne.
    अपने गम को गाओगे

    बज़्म गमगीन हो जाएगी

    किसी सीने से लग के रोना

    बड़ा आराम आएगा /………waah

    1. Ashwini Yadav Avatar

      बहुत बहुत शुक्रिया

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह

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