मुक्तक

हर सुबह ख्वाबों से रिश्ता टूट जाता है!
प्यार का पलकों में गुलिस्ताँ छूट जाता है!
खोजता हूँ मंजिलें तमन्नाओं की लेकिन,
मुझसे चाहतों का फरिश्ता रूठ जाता है!

मुक्तककार- #महादेव’

Comments

5 responses to “मुक्तक”

  1. Kanchan Dwivedi

    Nice one

  2. Pratima chaudhary

    Bahut badhiya

  3. Pragya Shukla

    Very good

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