मुक्तक

किसलिए हर आदमी खुद को जला रहा है?
सिलसिला-ए-दर्द़ से खुद को सता रहा है!
ढल रही है जिन्दगी शीशे की शक्ल में,
रास्तों में तन्हा पत्थर सा जा रहा है!

मुक्तककार- #महादेव’

Comments

4 responses to “मुक्तक”

  1. Kedar Singhal Avatar

    आपने तो दिल खुश कर दिया

  2. Kanchan Dwivedi

    Nice

  3. Pratima chaudhary

    Very nice

  4. Pragya Shukla

    ब्यूटीफुल

Leave a Reply

New Report

Close